लचीली सैंपलिंग के लिए सामान्य दिशा-निर्देश

यह समझने के लिए कि Google के उपयोगकर्ताओं और प्रकाशकों के सदस्यता मॉडल पर, मुफ़्त सैंपलिंग में हुए बदलावों का क्या संभावित असर पड़ा, हमने अपने प्रकाशन पार्टनरों के साथ मिलकर कई तरह के प्रयोग किए. इन प्रयोगों से हमें पता चला कि सैंपलिंग के मौजूदा तरीकों में मामूली बदलाव करने पर भी, उपयोगकर्ता के अनुभव पर बुरा असर पड़ सकता है. साथ ही, उपयोगकर्ता का ऐक्सेस प्रतिबंधित होने की वजह से, अनजाने में Google Search में लेख की रैंकिंग पर भी असर होता है.

हम दो तरह की सैंपलिंग की सलाह देते हैं: पहली है मीटरिंग, जिसमें उपयोगकर्ताओं को मुफ़्त में कुछ लेख दिए जाते हैं. इसके बाद, paywall दिखना शुरू हो जाता है. दूसरी सैंपलिंग है लीड-इन, जिसमें लेख का कुछ हिस्सा ही दिखता है. 

हम प्रकाशकों को अलग-अलग संख्या के साथ मुफ़्त सैंपल देने का प्रयोग, सावधानी से करने की सलाह देते हैं. यहां लचीली सैंपलिंग की सुविधा लागू करने के लिए कुछ सामान्य दिशा-निर्देश दिए गए हैं.

मीटरिंग

आम तौर पर, हमें लगता है कि रोज़ाना की मीटरिंग के मुकाबले, महीने की मीटरिंग बेहतर है. इससे, सैंपल जांच ज़्यादा आसानी से हो जाती है और कोई बुरा असर पड़ने का जोखिम भी कम हो जाता है. जैसे-जैसे सैंपल की वैल्यू एक-एक अंक से बढ़ाई जाती है, वैसे ही इस्तेमाल करने वालों का अनुभव बेहतर होता है. इसलिए, हर दिन 3 सैंपल मिलने के मुकाबले, एक महीने में 10 सैंपल मिलना बेहतर होता है. महीने के हिसाब से मीटरिंग करने का फ़ायदा यह भी है कि आप सबसे ज़्यादा दिलचस्पी दिखाने वाले अपने उपयोगकर्ताओं के लिए, paywall पर फ़ोकस कर सकते हैं. इन उपयोगकर्ताओं की सदस्यता लेने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है. इस बीच, अपने नए और कम दिलचस्पी दिखाने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए, paywall का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें आपके कॉन्टेंट की वैल्यू समझने दें. (इस संदर्भ में, paywall उन जगहों पर भी समान रूप से लागू होता है जहां से कॉन्टेंट को ऐक्सेस करने के लिए सदस्यता लेने या रजिस्टर करने की ज़रूरत होती है.)

कितना कॉन्टेंट मुफ़्त देना चाहिए?

अलग-अलग कारोबारों के लिए, ऐसी कोई तय संख्या नहीं है जिसे मुफ़्त सैंपलिंग के लिए सबसे सही माना जाए. हालांकि, हम उम्मीद करते हैं कि ज़्यादातर दैनिक समाचार प्रकाशक, हर उपयोगकर्ता को हर महीने 6 से 10 मुफ़्त लेख देंगे. हमें लगता है कि ज़्यादातर प्रकाशक अपने हिसाब से लेखों की वह संख्या चुन लेंगे जिससे नए संभावित सदस्यों को एक अच्छा उपयोगकर्ता अनुभव मिलेगा. इसके साथ ही, ज़्यादा दिलचस्पी दिखाने वाले उपयोगकर्ताओं को सदस्य बनने के ज़्यादा मौके मिलेंगे.

हमारी सलाह है कि एक्सप्लोरेशन (विश्लेषण का तरीका) की शुरुआत में, आप हर महीने Google Search के उपयोगकर्ताओं को 10 लेख उपलब्ध कराएं और फिर इसे दोहराएं. उपयोगकर्ताओं को कितने लेख उपलब्ध कराने हैं, इसका फ़ैसला हम प्रकाशकों पर छोड़ते हैं, क्योंकि वे अपने कारोबार की ज़रूरतों को सबसे अच्छी तरह समझते हैं. हम प्रकाशकों को, खोज करने वाले उन उपयोगकर्ताओं के मौजूदा प्रतिशत का विश्लेषण करने की सलाह देते हैं जो paywall को हिट करते हैं. साथ ही, हम उन्हें हर महीने एक ऐसी संख्या चुनने की सलाह देते हैं जो मिलता-जुलता नतीजा देती है. जब आपको यह भरोसा हो जाए कि आपने अपनी पकड़ बना ली है, तो बाद में आप इस संख्या को कम कर सकते हैं.

लीड-इन

मीटरिंग के अलावा, कुछ प्रकाशक paywall के पहले, "पेज के ऊपरी हिस्से" में लेख के कुछ शुरुआती वाक्यों को दिखाते हैं. हमें लगता है कि यह एक अच्छा तरीका है. प्रकाशक, लेख के अहम हिस्से दिखाकर, उपयोगकर्ताओं को पहले ही अपने कॉन्टेंट की वैल्यू बता सकते हैं. ऐसा करके, वे उपयोगकर्ताओं को ब्लॉक कॉन्टेंट वाले पेज के बजाय, ज़्यादा काम की जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं. लीड-इन की वजह से उपयोगकर्ता का ध्यान इस तरफ़ खिंचता है कि लेख में आगे क्या होगा. इससे, उपयोगकर्ता को सदस्य बनाने में मदद मिल सकती है.

बदलाव करना

प्रकाशक मुफ़्त सैंपल देने की अलग-अलग संख्या के साथ प्रयोग करना चाहेंगे, ताकि यह पता किया जा सके कि रेफ़रल ट्रैफ़िक और कन्वर्ज़न पर इनका क्या असर होता है.

ध्यान रखें, हमारी स्टडी से पता चला है कि जिन उपयोगकर्ताओं ने बहुत कम कॉन्टेंट ही पढ़ा या देखा हो और उनका सदस्यता लेना ज़रूरी कर दिया जाए, तो प्रॉडक्ट में उनकी दिलचस्पी काफ़ी कम हो जाती है. हमारे विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि जब paywall 10% से ज़्यादा बार दिखाए जाते हैं, तो एक सामान्य उपयोगकर्ता के अनुभव में काफ़ी गिरावट आती है (जिसका आम तौर पर यह मतलब होता है कि करीब 3% दर्शक या ऑडियंस को paywall दिखाया जा चुका है). हमारी सलाह है कि आप उस सीमा तक पहुंचने से बचें, क्योंकि इसकी वजह से ऐसे उपयोगकर्ता आपसे दूर जा सकते हैं जो अभी तक आपके कॉन्टेंट की वैल्यू पर भरोसा नहीं कर पाए हैं.

ऐसा हो सकता है कि बेहतर तकनीकी रिसॉर्स वाले प्रकाशक, ज़्यादा दिलचस्पी दिखाने वाले खास उपयोगकर्ताओं पर ज़्यादा बारीकी से फ़ोकस करना चाहें. जो उपयोगकर्ता हर महीने दिए जाने वाले लेखों को लगातार पढ़ते हैं, प्रकाशक उनकी पहचान करके सैंपल लेखों की संख्या कम कर सकते हैं. साथ ही, अन्य उपयोगकर्ताओं को बिना किसी परेशानी के मुफ़्त कॉन्टेंट पढ़ने की अनुमति देकर, उनका अनुभव खराब होने का जोखिम कम कर सकते हैं.

Paywall किए गए कॉन्टेंट को दिखाने का तरीका

अगर Googlebot और उपयोगकर्ताओं को दिया गया कॉन्टेंट अलग-अलग हो, तो paywall किए गए कॉन्टेंट में स्ट्रक्चर्ड डेटा जोड़ें. ऐसा करना इसलिए ज़रूरी है, ताकि Google को क्लोकिंग और paywall किए गए कॉन्टेंट में अंतर करने में मदद मिले.

स्ट्रक्चर्ड डेटा के साथ, paywall किए गए कॉन्टेंट को दिखाने का तरीका जानें.