Google Search के साथ वेबसाइट की टेस्टिंग करने के सबसे सही तरीके

इस पेज में बताया गया है कि यह कैसे पक्का किया जा सकता है कि पेज के कॉन्टेंट या पेज के यूआरएल में वेरिएशन की टेस्टिंग, Google Search की परफ़ॉर्मेंस पर कम से कम असर डाले. इस पेज में यह जानकारी नहीं दी गई है कि टेस्ट को कैसे बनाना या डिज़ाइन किया जाना चाहिए, लेकिन आपको पेज के आखिर में टेस्ट से जुड़ा और कॉन्टेंट मिल सकता है.

टेस्टिंग की खास जानकारी

वेबसाइट की टेस्टिंग तब होती है, जब आप अपनी वेबसाइट (या अपनी वेबसाइट के किसी हिस्से) के अलग-अलग वर्शन को आज़माते हैं और इससे जुड़ा डेटा इक्कठा करते हैं कि उपयोगकर्ता हर वर्शन के बारे में क्या सोचता है. आम तौर पर, आप सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करके अपने पेजों (पेज के कुछ हिस्से, सभी पेज या कई पेज) के दो अलग-अलग वैरिएंशन की तुलना करेंगे और देखेंगे कि कौनसा वर्शन आपके उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे ज़्यादा कारगर है.

A/B टेस्टिंग तब होती है, जब आप किसी पेज के कई वर्शन बनाकर टेस्ट करते हैं. इसमें हर वर्शन का अपना अलग यूआरएल होता है. जब उपयोगकर्ता मूल यूआरएल को ऐक्सेस करने की कोशिश करते हैं, तब आप उनमें से कुछ को वैरिएशन यूआरएल पर रीडायरेक्ट करते हैं और फिर यह देखने के लिए कि कौनसा पेज सबसे ज़्यादा कारगर है, उपयोगकर्ताओं के रिस्पॉन्स की तुलना की जाती है.

मल्टीवेरिएट (एक साथ कई वर्शन आज़माना) टेस्टिंग तब होती है, जब आप अपनी वेबसाइट के अलग-अलग हिस्सों को फटाफट बदलने के लिए सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं. आप पेज के कई हिस्सों में हुए बदलावों को टेस्ट कर सकते हैं. सॉफ़्टवेयर इनमें से हर सेक्शन के वैरिएशन को अलग-अलग तरीकों से उपयोगकर्ताओं को दिखाएगा और फिर आंकड़ों के साथ विश्लेषण करेगा कि कौनसे वैरिएशन सबसे ज़्यादा कारगर हैं. इनमें पेज का शीर्षक, कोई फ़ोटो, ‘कार्ट में शामिल करें’ बटन जैसे हिस्से शामिल होते हैं इसमें सिर्फ़ एक यूआरएल शामिल होता है; पेज में डाइनैमिक तौर पर वैरिएशन शामिल किए जाते हैं.

इसके आधार पर कि आप किस तरह के कॉन्टेंट को टेस्ट कर रहे हैं, शायद यह ज़्यादा मायने भी न रखे कि टेस्ट करने के दौरान Googlebot आपके कॉन्टेंट के कुछ वैरिएशन को क्रॉल या इंडेक्स करता है या नहीं. छोटे बदलावों, जैसे कि किसी बटन या इमेज के साइज़, रंग या प्लेसमेंट या “कॉल-टू-ऐक्शन” (“कार्ट में जोड़ें” बनाम “अभी खरीदें!”) के टेक्स्ट में हुए बदलावों का इस बात पर काफ़ी असर पड़ सकता है कि उपयोगकर्ता आपके पेज के साथ कैसे इंटरैक्ट करते हैं. हालांकि, आपके पेज के खोज के नतीजे वाले स्निपेट या रैंकिंग पर इन बदलावों का बहुत कम या कोई असर नहीं पड़ता है.

इतना ही नहीं, अगर हम टेस्टिंग का पता लगाने और उसे इंडेक्स करने के लिए आपकी साइट को काफ़ी बार क्रॉल करते हैं, तो ऐसे में जब आप टेस्टिंग पूरी कर लेंगे, तब हम आपकी साइट में होने वाले अपडेट को शायद तेज़ी से इंडेक्स कर पाएंगे.

टेस्टिंग के सबसे सही तरीके

यहां सबसे सही तरीकों के बारे में बताया गया है जिनकी मदद से साइट के वैरिएशन की टेस्टिंग के दौरान, Google Search पर कोई बुरा असर पड़ने से रोका जा सकता है:

अपने टेस्ट पेजों को क्लोक न करना

Googlebot को यूआरएल का एक सेट और उपयोगकर्ताओं को कोई दूसरा सेट न दिखाएं. इसे क्लोकिंग कहते हैं और यह हमारी वेबमास्टर गाइडलाइन के ख़िलाफ़ है, चाहे आप टेस्ट कर रहे हैं या नहीं. याद रखें कि हमारी गाइडलाइन का पालन न करने की वजह से, Google के खोज नतीजों में आपकी साइट की रैंकिंग घटाई जा सकती है या साइट को खोज के नतीजों से हटाया भी जा सकता है. आप नहीं चाहेंगे कि टेस्टिंग से आपको ऐसा नतीजा मिले.

सर्वर लॉजिक, robots.txt या किसी और तरीके का इस्तेमाल करके क्लोकिंग की जाती है. इसके बजाय, यहां दिए गए लिंक या रीडायरेक्ट का इस्तेमाल करें.

अगर आप एक से ज़्यादा यूआरएल पर A/B टेस्ट कर रहे हैं, तो आप अपने सभी वैकल्पिक यूआरएल पर rel="canonical" लिंक एट्रिब्यूट का इस्तेमाल करके, यह बता सकते हैं कि मूल यूआरएल ही आपका पसंदीदा वर्शन है. हम noindex मेटा टैग के बजाय rel="canonical" का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह इस स्थिति में आपके इंटेट से ज़्यादा मेल खाता है. उदाहरण के लिए, अगर आप अपने होम पेज के वैरिएशन की टेस्टिंग कर रहे हैं और आप नहीं चाहते कि सर्च इंजन आपके होम पेज को इंडेक्स करें. आप सिर्फ़ इतना चाहते हैं कि वे समझें कि सभी टेस्ट यूआरएल, मूल यूआरएल के डुप्लिकेट या वैरिएशन हैं और उनका मूल यूआरएल के साथ कैननिकल के तौर पर ग्रुप बनाया जाना चाहिए. ऐसी स्थिति में rel="canonical" के बजाय noindex का इस्तेमाल करने से, कभी-कभी अनचाहे नतीजे भी सामने आ सकते हैं.

302 रीडायरेक्ट का इस्तेमाल करना, 301 रीडायरेक्ट का नहीं

अगर आप ऐसा A/B टेस्ट कर रहे हैं जो उपयोगकर्ताओं को मूल यूआरएल से वैरिएशन यूआरएल पर रीडायरेक्ट करता है, तो 302 (अस्थायी) रीडायरेक्ट का इस्तेमाल करें, 301 (स्थायी) रीडायरेक्ट का नहीं. यह सर्च इंजन को बताता है कि यह रीडायरेक्ट अस्थायी है—यह सिर्फ़ तब तक रहेगा, जब तक आप टेस्ट कर रहे हैं—और उन्हें रीडायरेक्ट (टेस्ट पेज) के टारगेट के बजाय मूल यूआरएल को ही अपने इंडेक्स में रखना चाहिए. JavaScript पर आधारित रीडायरेक्ट भी ठीक होते हैं.

टेस्ट तब तक करें, जब तक यह ज़रूरी हो

कारगर टेस्ट में लगने वाला समय, कन्वर्ज़न दर और आपकी वेबसाइट पर आने वाले ट्रैफ़िक जैसी चीज़ों पर निर्भर करेगा; जब कारगर नतीजा निकालने के लिए ज़रूरी डेटा इकट्ठा हो जाए, तब एक अच्छे टेस्टिंग टूल को आपको इसके बारे में सूचित करना चाहिए. टेस्टिंग पूरी करने के बाद, आपको अपनी साइट को मनचाहे कॉन्टेंट वैरिएशन में अपडेट करना चाहिए और टेस्ट के सभी एलिमेंट को जल्द से जल्द हटा देना चाहिए. इनमें वैकल्पिक यूआरएल या टेस्ट स्क्रिप्ट और मार्कअप जैसे एलिमेंट शामिल होते हैं. अगर हमें ऐसी किसी साइट का पता चलता है जिस पर लंबे समय से टेस्टिंग चल रही है, तो हम इसे सर्च इंजन को धोखा देने की कोशिश मानकर, इस पर कार्रवाई कर सकते हैं. ऐसा तब होता है, जब आप कॉन्टेंट के किसी वैरिएशन को कई उपयोगकर्ताओं को दिखाते हैं.

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