एक से ज़्यादा इलाकों के लिए और कई भाषाओं में बनाई गई साइटें मैनेज करना

अगर आपकी साइट पर अलग-अलग भाषाओं, देशों या जगहों के हिसाब से अलग-अलग कॉन्टेंट है, तो आप अपनी साइट के लिए Google Search के नतीजों को ऑप्टिमाइज़ कर सकते हैं.

बुनियादी जानकारी:

  • एक से ज़्यादा भाषाओं वाली वेबसाइट वह वेबसाइट होती है जिस पर एक से ज़्यादा भाषाओं में कॉन्टेंट मौजूद होता है. उदाहरण के लिए, एक कैनेडियन कारोबार, जिसकी साइट अंग्रेज़ी और फ़्रेंच भाषा में मौजूद हो. Google Search, खोजने वाले व्यक्ति की भाषा में पेज ढूंढने की कोशिश करता है.
  • एक से ज़्यादा इलाकों के लिए बनाई गई वेबसाइट वह वेबसाइट होती है, जो साफ़ तौर पर अलग-अलग देशों के उपयोगकर्ताओं को टारगेट करती है (उनके हिसाब से बनाई जाती है). उदाहरण के लिए, प्रॉडक्ट बनाने वाली ऐसी कंपनी की साइट, जो कनाडा और अमेरिका दाेनाें में सामान भेजती है. Google Search, खोज करने वाले व्यक्ति के हिसाब से, सही इलाके के लिए बना पेज ढूंढने की कोशिश करता है.

कुछ साइटों का कॉन्टेंट अलग-अलग इलाकों के हिसाब से होने के साथ कई भाषाओं में भी होता है: उदाहरण के लिए, किसी साइट के अमेरिका और कनाडा के लिए अलग-अलग वर्शन हो सकते हैं. साथ ही, इस साइट के कनेडियन कॉन्टेंट वाली साइट के भी दो अलग-अलग वर्शन हो सकते हैं, जो इसे फ़्रेंच और अंग्रेज़ी भाषा में दिखाते हों.

अपनी साइट के एक से ज़्यादा भाषाओं वाले वर्शन प्रबंधित करना

अगर आपकी साइट पर एक जैसा कॉन्टेंट एक से ज़्यादा भाषाओं में मौजूद है, तो सही पेज ढूंढने के लिए, उपयोगकर्ता और Google Search इन सलाहों की मदद ले सकते हैं:

अलग-अलग भाषाओं वाले वर्शन के लिए, अलग-अलग यूआरएल इस्तेमाल करना

Google का सुझाव है कि आप किसी पेज के अलग-अलग भाषाओं वाले वर्शन के लिए, अलग-अलग यूआरएल इस्तेमाल करें. Google के हिसाब से आपको पेज पर मौजूद कॉन्टेंट की भाषा बदलने के लिए, कुकी या ब्राउज़र की सेटिंग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

अगर आप अलग-अलग भाषाओं के लिए अलग-अलग यूआरएल इस्तेमाल करते हैं, तो Google के खोज के नतीजों में किसी पेज का सही भाषा वाला वर्शन दिखाने के लिए hreflang एनोटेशन का इस्तेमाल करें.

अगर आप चाहते हैं कि आपकी वेबसाइट पर मौजूद कॉन्टेंट में ज़रूरत के हिसाब से (डाइनैमिक रूप से) बदलाव हों या भाषा की सेटिंग के मुताबिक उपयोगकर्ता दूसरे लिंक पर जाए, तो इस बात का ध्यान रखें कि शायद Google आपके पेज के सारे वर्शन न ढूंढ पाए और उन्हें क्रॉल न कर पाए. इसकी वजह यह है कि Googlebot क्रॉलर आम तौर पर अमेरिका के होते हैं. इसके अलावा, अनुरोध के हेडर में Accept-Language सेट किए बिना क्रॉलर, एचटीटीपी अनुरोध भेजता है.

Google को अपने पेज के अलग-अलग भाषाओं वाले वर्शन के बारे में बताना

Google को किसी पेज के अलग-अलग भाषाओं और जगहों वाले वर्शन के बारे में बताने के कई तरीके हैं. इनमें hreflang ऐनोटेशन और साइटमैप भी शामिल हैं. अपने पेज के हिसाब से सबसे सही तरीका इस्तेमाल करके उसे लेबल करें.

ध्यान दें कि पेज की भाषा ऐसी होनी चाहिए जो आसानी से समझ आ जाए

Google आपके पेज पर दिख रहे कॉन्टेंट का इस्तेमाल करके, पेज की भाषा का पता लगाता है. हम lang एट्रिब्यूट या यूआरएल जैसी कोड-लेवल भाषा में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल नहीं करते. अपने पेज की सही भाषा पहचानने में Google की मदद करने के लिए, हर पेज के कॉन्टेंट और नेविगेशन के लिए एक ही भाषा का इस्तेमाल करें. साथ ही, साइट के मूल कॉन्टेंट के साथ उसका अनुवाद न दिखाएं.

पेज के ज़्यादातर कॉन्टेंट को एक ही भाषा में (जैसा कि अक्सर यूज़र जनरेटेड कॉन्टेंट दिखाने वाले पेजों में होता है) रखकर सिर्फ़ बॉयलरप्लेट टेक्स्ट का अनुवाद किए जाने की वजह से, आपकी साइट के उपयोगकर्ताओं के लिए खराब अनुभव हो सकता है. ऐसा तब होता है, जब खोज के नतीजों में एक ही कॉन्टेंट, अलग-अलग बॉयलरप्लेट भाषाओं में कई बार दिखता है.

सर्च इंजन को अपनी साइट पर ऐसे पेज क्रॉल करने से रोकें जिनके कॉन्टेंट का अनुवाद मशीन से होता है. ऐसा करने के लिए, robots.txt का इस्तेमाल करें. मशीन से किया गया अनुवाद हमेशा सही नहीं होता और इसे स्पैम के तौर पर देखा जा सकता है. इससे भी ज़रूरी बात यह है कि खराब अनुवाद की वजह से, आपकी साइट की छवि पर बुरा असर पड़ सकता है.

उपयोगकर्ता को पेज की भाषा बदलने का विकल्प देना

अगर आपकी साइट के किसी पेज के एक से ज़्यादा वर्शन हैं तो:

  • पेज के दूसरी भाषाओं वाले वर्शन के हाइपरलिंक जोड़ें. ऐसा करने से उपयोगकर्ता, पेज के अलग-अलग भाषाओं वाले वर्शन पर क्लिक करके उन्हें चुन सकते हैं.
  • उपयोगकर्ता जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहा है उसके हिसाब से, उपयोगकर्ता को अपने-आप दूसरे वेबलिंक पर न भेजें. इस तरह दूसरे वेबलिंक पर भेजने से, उपयोगकर्ता और सर्च इंजन आपकी साइट के सभी वर्शन नहीं देख पाएंगे.

अलग-अलग भाषा के लिए, अलग-अलग यूआरएल का इस्तेमाल करना

यूआरएल में स्थानीय जगह के हिसाब से शब्दों या अंतरराष्ट्रीय स्तर के डोमेन नाम (आईडीएन) का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, यूआरएल में UTF-8 एनकोडिंग का ही इस्तेमाल करें (हमारा सुझाव है कि जहां भी मुमकिन हो, UTF-8 का ही इस्तेमाल करें). साथ ही, यूआरएल जोड़ते समय उन्हें ठीक तरह से एस्केप करना न भूलें.

किसी खास देश (इलाके के हिसाब से टारगेट करना) के हिसाब से साइट पर कॉन्टेंट दिखाना

आप अपनी वेबसाइट या इसके कुछ हिस्सों को किसी खास देश में, कोई खास भाषा बोलने वाले लोगों के लिए टारगेट कर सकते हैं. ऐसा करने से, टारगेट किए गए देश में आपके पेज की रैंक बेहतर हो सकती है. हालांकि, दूसरे इलाकों या भाषाओं में यह कम भी हो सकती है.

Google पर अपनी साइट को किसी इलाके के हिसाब से टारगेट करना:

याद रखें, यह ज़रूरी नहीं है कि इलाके के हिसाब से टारगेट करने से आपको बिल्कुल सही नतीजे मिलें. इसलिए, उन उपयोगकर्ताओं का भी ध्यान रखें जो आपकी साइट के "गलत" वर्शन पर चले जाते हैं. ऐसा करने का एक तरीका यह है कि सभी पेजों पर उपयोगकर्ताओं को ऐसे लिंक दिखाए जाएं जिनके ज़रिए, वे अपना इलाका और/या अपनी पसंद की भाषा चुन सकें.

कॉन्टेंट को किसी खास इलाके के हिसाब से बनाने के लिए, आईपी पते से पता की गई जगह की जानकारी का इस्तेमाल न करें. आईपी पते से जगह की जानकारी का पता लगाना मुश्किल हाेता है और आम तौर पर इस पर भराेसा नहीं किया जा सकता. इस वजह से, शायद Google आपकी साइट के अलग-अलग वर्शन काे ठीक से क्रॉल न कर पाए. हमेशा ताे नहीं लेकिन ज़्यादातर मामलाें में, Google अमेरिका से साइट क्रॉल करता है और हम साइट के अलग-अलग वर्शन काे पहचानने के लिए अपनी जगह नहीं बदलते हैं. आईपी पते के बजाय, यहां दिखाए गए पूरी जानकारी देने वाले तरीकों में से एक का इस्तेमाल करें (hreflang, वैकल्पिक यूआरएल और अलग से बनाए गए लिंक).

अलग-अलग इलाकों के लिए अलग-अलग यूआरएल इस्तेमाल करना

ऐसे यूआरएल इस्तेमाल करें जिनसे आपकी साइट या इसके कुछ हिस्सों के लिए अलग-अलग जगहों के उपयोगकर्ता टारगेट हो पाएं. नीचे दिए गए टेबल में आपके लिए उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई है:

यूआरएल की बनावट उदाहरण के तौर पर यूआरएल फ़ायदे Cons
खास देश के लिए डोमेन example.de
  • इलाके के हिसाब से सही तरीके से टारगेट करने की सुविधा
  • सर्वर की जगह की जानकारी डालने की ज़रूरत नहीं होती
  • साइटों के अलग-अलग वर्शन आसानी से बनाए जा सकते हैं
  • महंगे होते हैं (कुछ ही जगहों में उपलब्ध हो सकते हैं)
  • सामान्य से ज़्यादा बुनियादी सुविधाओं की ज़रूरत होती है
  • कभी-कभी सीसीटीएलडी की पूरी जानकारी देना ज़रूरी होता है
जीटीएलडी वाले सबडोमेन de.example.com
  • आसानी से सेटअप किए जा सकते हैं
  • Search Console की इलाके के हिसाब से टारगेट करने की सुविधा इस्तेमाल की जा सकती है
  • एक से ज़्यादा जगहों वाले सर्वर इस्तेमाल किए जा सकते हैं
  • साइटों के अलग-अलग वर्शन आसानी से बनाए जा सकते हैं
  • शायद उपयोगकर्ता सिर्फ़ यूआरएल की मदद से टारगेट किए गए इलाकों की पहचान न कर पाएं (यह दुविधा हो सकती है कि "de" भाषा है या देश?)
जीटीएलडी वाली सबडायरेक्ट्री example.com/de/
  • आसानी से सेटअप किए जा सकते हैं
  • Search Console की इलाके के हिसाब से टारगेट करने की सुविधा इस्तेमाल की जा सकती है
  • एक ही होस्ट होने की वजह से कम रखरखाव की ज़रूरत होती है
  • शायद उपयोगकर्ता सिर्फ़ यूआरएल की मदद से टारगेट किए गए इलाकों की पहचान न कर पाएं
  • एक ही जगह पर मौजूद सर्वर इस्तेमाल किए जा सकते हैं
  • साइट के अलग-अलग वर्शन बनाना मुश्किल होता है
यूआरएल पैरामीटर site.com?loc=de
  • इसका इस्तेमाल करने का सुझाव नहीं दिया जाता.
  • साइट के अलग-अलग वर्शन के लिए अलग-अलग यूआरएल बनाना मुश्किल होता है
  • शायद उपयोगकर्ता सिर्फ़ यूआरएल की मदद से टारगेट किए गए इलाकों की पहचान न कर पाएं
  • Search Console में इलाके के हिसाब से टारगेट करने की सुविधा इस्तेमाल नहीं की जा सकती

Google किसी साइट के लिए टारगेट किया गया इलाका कैसे तय करता है?

किसी पेज के लिए सही दर्शक ढूंढने के लिए, Google कई चीज़ों का इस्तेमाल करता है:

  • Search Console की अंतरराष्ट्रीय उपयोगकर्ताओं को टारगेट करने की रिपोर्ट का इस्तेमाल करके, टारगेट किए गए स्थान-भाषा के बारे में बताना. अगर आपके डोमेन नाम में डॉट के बाद का हिस्सा जेनरिक (जीटीएलडी) है और आप अपनी साइट को दूसरे देश की सर्वर देने वाली संस्था पर होस्ट कर रहे हैं, तो हमारा सुझाव है कि आप Search Console की मदद से हमें बताएं कि आपकी साइट किस देश के लिए बनाई गई है. ऐसा तब करें, जब आप अपनी साइट के लिए, इलाके के हिसाब से उपयोगकर्ताओं को टारगेट करना चाहते हैं.
  • देश कोड डोमेन नाम में डॉट के बाद का हिस्सा (सीसीटीएलडी). ये कोड किसी खास देश के लिए होते हैं (उदाहरण के लिए, जर्मनी के लिए .de, चीन के लिए .cn). सर्च इंजन और उपयोगकर्ताओं के लिए यह मुख्य जानकारी होती है जो बताती है कि आपकी साइट किसी खास देश के लिए बनाई गई है. (कुछ देशों में इस बात पर पाबंदी लगी है कि सीसीटीएलडी का इस्तेमाल कौन कर सकता है. इसलिए, पहले इस बारे में जानकारी इकट्ठा कर लें.) हम कुछ खास सीसीटीएलडी (जैसे कि .tv और .me) को जीटीएलडी जैसा ही मानते हैं. इसकी वजह यह है कि उपयोगकर्ता और वेबसाइट के मालिक, इन्हें किसी खास देश के लिए टारगेट किए गए डोमेन की तरह मानने के बजाय सामान्य डोमेन मानते हैं. हमारे पास ऐसे खास सीसीटीएलडी की पूरी सूची नहीं है जिन्हें हम जीटीएलडी जैसा मानते हैं, क्योंकि यह सूची समय के साथ बदलती रहती है. Google की जीटीएलडी वाली सूची देखें.
  • hreflang स्टेटमेंट, चाहे वे टैग, हेडर या साइटमैप में हों.
  • सर्वर के आईपी पते की मदद से, सर्वर की जगह की जानकारी. आम तौर पर, सर्वर आपकी साइट के उपयोगकर्ताओं के आस-पास की जगह पर मौजूद होता है. इससे पता चल सकता है कि आपकी साइट कहां रहने वाले दर्शकों के लिए है. कुछ वेबसाइटें, कॉन्टेंट डिलीवरी नेटवर्क (सीडीएन) के ज़रिए एक से ज़्यादा सर्वर का इस्तेमाल करती हैं या वे ऐसे देश से होस्ट की जाती हैं जहां वेब सर्वर बेहतर तरीके से काम करते हैं. इसलिए, सर्वर की जगह की जानकारी से टारगेट इलाके के बारे में साफ़ तौर पर पता नहीं चलता.
  • पेज के लिए सही दर्शक ढूंढने के दूसरे तरीके. आपकी साइट के लिए सही दर्शकों का पता लगाने के लिए, दूसरी जानकारी भी इस्तेमाल होती है. इनमें पेज पर मौजूद स्थानीय पते और फ़ोन नंबर शामिल हैं. इसके अलावा, पेज पर मौजूद स्थानीय भाषा और मुद्रा, दूसरी स्थानीय साइटों के लिंक और/या Google My Business (जहां उपलब्ध हो) से भी इस बारे में पता लगाया जा सकता है.

Google ऐसा नहीं करता:

  • Google, दुनिया भर की अलग-अलग जगहों की वेबसाइटों को क्रॉल करता है. हम किसी साइट पर मौजूद पेज के अलग-अलग वर्शन ढूंढने के लिए, उस पर इस्तेमाल किए गए क्रॉलर का स्रोत बदलने की कोशिश नहीं करते हैं. इसलिए, अपनी साइट के लिए अलग-अलग इलाकों और भाषाओं वाले वर्शन के बारे में Google को साफ़ तौर पर बताएं. इसके लिए यहां बताए गए तरीकों (जैसे कि hreflang एंट्री, सीसीटीएलडी या अलग से बनाए गए लिंक) का इस्तेमाल करें.
  • जगह की जानकारी से जुड़े मेटा टैग (जैसे कि geo.position या distribution) या इलाके के हिसाब से टारगेट करने के लिए इस्तेमाल होने वाले एचटीएमएल एट्रिब्यूट पर Google ध्यान नहीं देता.

एक से ज़्यादा भाषाओं/इलाकों के लिए बनाई गई साइटों के साथ डुप्लीकेट पेजों को प्रबंधित करना

अगर एक से ज़्यादा इलाकों में दिखने वाली किसी साइट के अलग-अलग यूआरएल में मिलता-जुलता या डुप्लीकेट कॉन्टेंट है और दोनों वर्शन में एक ही भाषा (जैसे example.de/ और example.com/de/, दोनों ही जर्मन भाषा में मिलते-जुलते कॉन्टेंट दिखाती हैं) का इस्तेमाल होता है, तो आपको इनमें से एक को मुख्य वर्शन के तौर पर चुनना होगा. इसके लिए, आपको rel="canonical" एलिमेंट और hreflang टैग इस्तेमाल करने होंगे, ताकि खोजने वाले लोगों को उनकी भाषा या इलाके के हिसाब से सही यूआरएल मिल सके.

जेनरिक डोमेन नाम में डॉट के बाद का हिस्सा

जेनरिक डोमेन नाम में डॉट के बाद के हिस्से (जीटीएलडी) ऐसे डोमेन होते हैं जो किसी खास जगह से नहीं जुड़े होते. अगर आपकी साइट पर .com, .org जैसे जेनरिक डोमेन नाम में डॉट के बाद का हिस्सा या नीचे दिए गए डोमेन में से कोई इस्तेमाल होता है और आप किसी खास जगह के उपयोगकर्ताओं को टारगेट करना चाहते हैं, तो टारगेट करने के लिए साफ़ तौर पर एक देश का नाम सेट करें. ऐसा करने के लिए, आप पहले बताए जा चुके तरीकों में से किसी एक का इस्तेमाल कर सकते हैं.

यहां दिए गए डोमेन को Google ऐसे जीटीएलडी मानता है जिन्हें Search Console में, इलाके के हिसाब से टारगेट किया जा सकता है:

  • जेनरिक टॉप लेवल डोमेन (जीटीएलडी): जब तक किसी टॉप लेवल डोमेन को आईसीएएनएन पर देश कोड टॉप लेवल डोमेन (सीसीटीएलडी) के रूप में रजिस्टर नहीं किया जाता, तब तक Google उन सभी टीएलडी को जीटीएलडी मानेगा जो आईएएनए डीएनएस के रूट ज़ोन से होते हैं. उदाहरण:
    • .com
    • .org
    • .edu
    • .gov
    • इनके अलावा और भी कई डोमेन...
  • जेनरिक डोमेन नाम में डॉट के बाद का हिस्सा: हालांकि, ये डोमेन किसी खास जगह के लिए होते हैं, लेकिन आम तौर पर इन्हें जेनरिक डोमेन नाम में डॉट के बाद का हिस्सा (.com या .org की तरह) ही माना जाता है:
    • .eu
    • .asia
  • जेनरिक देश कोड डोमेन नाम में डॉट के बाद का हिस्सा (सीसीटीएलडी): Google कुछ सीसीटीएलडी (जैसे कि .tv और .me) को जीटीएलडी जैसा ही मानता है. इसकी वजह यह है कि उपयोगकर्ता और वेबसाइट के मालिक, अक्सर इन्हें किसी खास देश के लिए टारगेट किए गए डोमेन मानने के बजाय सामान्य डोमेन मानते हैं. ऐसे कुछ सीसीटीएलडी की सूची यहां दी गई है (यह सूची बदल सकती है).
    • .ad
    • .as
    • .bz
    • .cc
    • .cd
    • .co
    • .dj
    • .fm
    • .io
    • .la
    • .me
    • .ms
    • .nu
    • .sc
    • .sr
    • .su
    • .tv
    • .tk
    • .ws