Google Images काे इस्तेमाल करने के सबसे सही तरीके

ब्लूबेरी स्मूदी

Google Images से, वेब पर मौजूद जानकारी को इमेज के रूप में ढूंढा जा सकता है. इमेज कैप्शन, खास तौर से दिखने वाले बैज, और एएमपी नतीजों जैसी नई सुविधाओं का इस्तेमाल करके उपयाेगकर्ता, इमेज के ज़रिए तेज़ी से ज़्यादा जानकारी पा सकते हैं.

इमेज के विषय से जुड़ी ज़्यादा जानकारी डालने से खोज के नतीजों में आपका कॉन्टेंट दिख सकता है. इससे आपकी साइट पर आने वाला ट्रैफ़िक भी बेहतर क्वालिटी का होगा. खोज के नतीजों में आपका कॉन्टेंट आसानी से दिखे, इसके लिए पक्का करें कि आपकी इमेज और साइट, Google Images के हिसाब से ऑप्टिमाइज़ किए गए हों. हमारे दिशा-निर्देशों का पालन करें. ऐसा करने से Google Images के खोज नतीजाें में आपके कॉन्टेंट के दिखने की संभावना बढ़ सकती है.

'इमेज सर्च' में किसी इमेज को सीधे लिंक न करना

अगर आप चाहें, तो Google Images के खोज नतीजाें वाले पेज में फ़ुल साइज़ की इमेज काे दिखने से राेक सकते हैं. इसके लिए, आपको Google Images के खोज नतीजाें से इमेज के सीधे लिंक हटाने हाेंगे.

अगर आप 'इमेज सर्च' में किसी इमेज को सीधे लिंक नहीं करना चाहते हैं, तो आप ये काम कर सकते हैं:

  1. आपकी इमेज का अनुरोध किए जाने के बाद, अनुरोध में एचटीटीपी के रेफ़रल देने वाले हेडर की जांच करें.
  2. अगर अनुरोध किसी Google डोमेन से किया गया है, तो जवाब में एचटीटीपी 200 या 204 दिखाएं और कोई कॉन्टेंट न दिखाएं.

इसके बावजूद Google आपका पेज क्रॉल करके इमेज को देखेगा, लेकिन वह उपयोगकर्ता को खोज नतीजों में, क्रॉल करते समय बनने वाली थंबनेल इमेज दिखाएगा. आप किसी भी समय ऐसा कर सकते हैं. इसके लिए, वेबसाइट की इमेज को फिर से प्रोसेस करने की ज़रूरत नहीं होती. इस प्रोसेस को इमेज क्लोकिंग नहीं माना जाता और इस पर मैन्युअल ऐक्शन भी नहीं लिया जाता.

आप खोज नतीजों में इमेज को दिखाए जाने पर पूरी तरह रोक भी लगा सकते हैं.

बेहतरीन उपयोगकर्ता अनुभव देना

अपने कॉन्टेंट को Google Images के खोज नतीजों में बेहतर तरीके से दिखाने के लिए उपयोगकर्ताओं और उनकी ज़रूरतों को ध्यान में रखें. साथ ही, उन्हें बेहतरीन अनुभव देने के लिए काम करें: पेजों को सर्च इंजन के लिए नहीं, बल्कि उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर बनाएं. इसके लिए, यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:

  • इमेज के विषय की ज़्यादा जानकारी डालें: पक्का करें कि इमेज के रूप में दिखाया जा रहा कॉन्टेंट, पेज के विषय से मिलता-जुलता हो. पेज पर, इमेज वहीं लगाएं जहां वह जानकारी को बेहतर ढंग से दिखाती हो. हमारा सुझाव है कि ऐसे पेज न बनाएं जिन पर इमेज या टेक्स्ट, दोनों ही ओरिजनल न हों.
  • इमेज को सही जगह पर लगाएं: जहां भी हो सके, इमेज को उससे जुड़े टेक्स्ट के पास ही लगाएं. अगर देखने में सही लगे, तो सबसे अहम इमेज को पेज के सबसे ऊपरी हिस्से में रखें.
  • ज़रूरी टेक्स्ट को इमेज में न जोड़ें: इमेज में टेक्स्ट को जोड़ने से बचें. खास तौर से पेज के शीर्षक और मेन्यू आइटम जैसे ज़रूरी टैक्स्ट को इमेज में न जोड़ें, क्योंकि ऐसा करने से सभी उपयोगकर्ता इन्हें नहीं देख पाएंगे (और पेज का अनुवाद करने वाले टूल, इमेज का अनुवाद नहीं कर सकते). अपना टेक्स्ट एचटीएमएल फ़ॉर्मैट में डालें, ताकि इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोग देख सकें. साथ ही, इमेज के लिए वैकल्पिक टेक्स्ट दें.
  • जानकारी से भरपूर और अच्छी क्वालिटी की साइट बनाएं: Google Images में अच्छी इमेज दिखना जितना अहम है, आपके वेबपेज पर अच्छा कॉन्टेंट दिखना भी उतना ही अहम है. इससे नतीजों में इमेज के बारे में सही जानकारी दिखती है और ज़्यादा लाेग उस पर क्लिक करते हैं. पेज के कॉन्टेंट का इस्तेमाल, इमेज के लिए टेक्स्ट स्निपेट बनाने में किया जा सकता है. इमेज रैंक करते समय Google, पेज के कॉन्टेंट की क्वालिटी को भी ध्यान में रखता है.
  • डिवाइस पर आसानी से इस्तेमाल होने वाली साइट बनाएं: उपयोगकर्ता, डेस्कटॉप के मुकाबले मोबाइल पर, Google Images पर ज़्यादा चीज़ें खोजते हैं. इसलिए, ज़रूरी है कि आप अपनी साइट को सभी तरह के डिवाइस और स्क्रीन साइज़ के हिसाब से डिज़ाइन करें. मोबाइल फ़्रेंडली जांच टूल का इस्तेमाल करके जांचें कि आपके पेज, मोबाइल डिवाइस पर सही काम कर रहे हैं या नहीं. साथ ही, इस टूल की मदद से यह सुझाव भी पाएं कि किन चीज़ों को ठीक करना है.
  • अपनी इमेज के लिए, आसानी से समझ में आने वाला यूआरएल बनाएं: आपकी इमेज के बारे में जानने के लिए Google, यूआरएल पाथ के साथ-साथ फ़ाइल के नाम का भी इस्तेमाल करता है. अपनी इमेज के कॉन्टेंट को व्यवस्थित करें, ताकि यूआरएल सही तरीके से बनाए जा सकें.

अपने पेज का शीर्षक और जानकारी जांचना

Google Images से अपने-आप एक शीर्षक और स्निपेट जनरेट होता है. इनकी मदद से हर नतीजे के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है और यह भी बताया जाता है कि कोई नतीजा, उपयोगकर्ता की क्वेरी से कैसे जुड़ा है. इससे उपयोगकर्ताओं को यह तय करने में मदद मिलती है कि उस नतीजे पर क्लिक करना है या नहीं.

इस जानकारी के लिए हम कई स्रोत इस्तेमाल करते हैं. इसमें शीर्षक में शामिल जानकारी और हर पेज का मेटा टैग शामिल होता है.

शीर्षक और स्निपेट के लिए, Google के दिशा-निर्देशों का पालन करके, आप अपने पेज के लिए दिखाए जाने वाले शीर्षक और स्निपेट की क्वालिटी बेहतर बनाने में हमारी मदद कर सकते हैं.

स्ट्रक्चर्ड डेटा जोड़ना

इमेज के साथ स्ट्रक्चर्ड डेटा देने पर, Google Images आपकी इमेज को खास बैज के साथ, ज़्यादा बेहतर नतीजों (रिच रिज़ल्ट) के रूप में दिखा सकता है. इससे उपयोगकर्ताओं को आपके पेज के बारे में ज़रूरी जानकारी मिलती है. साथ ही, आपकी साइट पर बेहतर ट्रैफ़िक (ऐसे लाेग जिनको ध्यान में रखकर आपने साइट बनाई है) आता है. स्ट्रक्चर्ड डेटा का इस्तेमाल करके, जिस तरह के ज़्यादा बेहतर नतीजे (रिच रिज़ल्ट) Google Images में दिखाए जा सकते हैं वे यहां दिए गए हैं:

स्ट्रक्चर्ड डेटा के लिए सामान्य दिशा-निर्देशों के साथ-साथ, अपने स्ट्रक्चर्ड डेटा पर लागू होने वाले दूसरे दिशा-निर्देशों का भी पालन करें. ऐसा नहीं करने पर हो सकता है कि आपका स्ट्रक्चर्ड डेटा, Google Images के ज़्यादा बेहतर नतीजों (रिच रिज़ल्ट) में न दिखाया जाए. इनमें से हर तरह के स्ट्रक्चर्ड डेटा के लिए, बैज पाने और Google Images के ज़्यादा बेहतर नतीजों (रिच रिज़ल्ट) में दिखने के लिए इमेज एट्रिब्यूट एक ज़रूरी फ़ील्ड है.

इमेज को ऑप्टिमाइज़ करना, ताकि वे तेज़ी से खुल सकें

पूरे पेज में अक्सर ज़्यादातर हिस्सा इमेज का होता है. इसलिए, इस वजह से पेज लोड होने में ज़्यादा समय लग सकता है. साथ ही, लोड होने में ज़्यादा डेटा खर्च होने की वजह से महंगा हो सकता है. उपयाेगकर्ताओं को अच्छी क्वालिटी वाली इमेज और तेज़ी से लोड होने वाले पेज की सुविधा देने के लिए, इमेज को ऑप्टिमाइज़ करने की नई तकनीक और रिस्पॉन्सिव (डिवाइस के हिसाब से आकार बदलने वाली) इमेज बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक अपनाएं.

Google Images में किसी पेज पर एएमपी का लोगो होने का मतलब है कि वह पेज तेज़ी और आसानी से लोड हो सकता है. आप जिस पेज पर इमेज होस्ट कर रहे हैं उसे एएमपी बनाना एक अच्छा विकल्प है. इससे पेज लोड होने में कम समय लगेगा (यहां उस टारगेट पेज के जल्दी लोड होने की बात हो रही है जिस पर कोई उपयोगकर्ता तब पहुंचता है, जब वह Google Images में किसी नतीजे पर क्लिक करता है).

आप PageSpeed Insights टूल का इस्तेमाल करके, अपनी साइट की रफ़्तार की जांच कर सकते हैं. साथ ही, आप वेब की बुनियादी बातें बताने वाले हमारे पेज पर जाकर, वेबसाइट की परफ़ॉर्मेंस को बेहतर बनाने के सबसे अच्छे तरीकों और तकनीकों बारे में जान सकते हैं.

अच्छी क्वालिटी की फ़ोटो जोड़ना

धुंधली और साफ़ दिखाई न देने वाली इमेज के मुकाबले, अच्छी क्वालिटी की फ़ोटो, उपयोगकर्ता का ध्यान ज़्यादा खींचती हैं. साथ ही, खोज के नतीजे में दिखने वाले थंबनेल में बेहतर क्वालिटी की इमेज, उपयोगकर्ताओं का ध्यान ज़्यादा खींचती हैं. इससे आपके पेज पर उपयोगकर्ताओं के आने की संभावना बढ़ जाती है.

इमेज में ज़्यादा जानकारी वाले शीर्षक, कैप्शन, फ़ाइलों के नाम, और टेक्स्ट शामिल करना

इमेज के कैप्शन और शीर्षक समेत उसके विषय के बारे में जानने के लिए Google, पेज का कॉन्टेंट देखता है. जहां तक हो सके, यह पक्का करें कि इमेज को उसके विषय से जुड़े टेक्स्ट के साथ ही दिखाया जाए. साथ ही, यह भी पक्का करें कि जिस पेज पर इमेज दिखाई जा रही है वह पेज भी इमेज के विषय से मिलता-जुलता हो.

इसी तरह, फ़ाइल के नाम से Google को यह पता करने में मदद मिलती है कि इमेज किस विषय के बारे में है. उदाहरण के लिए, फ़ाइल का नाम IMG00023.JPG के बजाय my-new-black-kitten.jpg रखना.

ज़्यादा जानकारी वाला वैकल्पिक टेक्स्ट इस्तेमाल करना

वैकल्पिक टेक्स्ट (जो टेक्स्ट इमेज के बारे में जानकारी देता है) से उन लोगों को बेहतर अनुभव मिलता है जो वेब पेज पर इमेज नहीं देख पाते. इनमें ऐसे उपयोगकर्ता भी शामिल हैं जो स्क्रीन रीडर इस्तेमाल करते हैं या जिनका इंटरनेट कनेक्शन धीमा है.

इमेज किस विषय से जुड़ी है, यह समझने के लिए Google, कंप्यूटर विज़न एल्गोरिदम और पेज के कॉन्टेंट के साथ-साथ वैकल्पिक टेक्स्ट का इस्तेमाल करता है. अगर आप इमेज को लिंक के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इमेज में वैकल्पिक टेक्स्ट, ऐंकर टेक्स्ट (जिस पर क्लिक करके आपकी साइट पर पहुंचा जा सकता है) के रूप में भी काम करता है.

वैकल्पिक टेक्स्ट को चुनने पर इस ध्यान रखें कि आप काम का और जानकारी से भरपूर कॉन्टेंट बनाएं. ऐसा कॉन्टेंट जिसमें सही तरीके से कीवर्ड इस्तेमाल किए गए हों और वह पेज के कॉन्टेंट के हिसाब से हो. ऑल्ट एट्रिब्यूट में ज़्यादा कीवर्ड डालने (कीवर्ड स्टफ़िंग (बार-बार एक जैसे कीवर्ड डालना)) से बचें, क्योंकि इससे उपयोगकर्ताओं को परेशानी हो सकती है. साथ ही, इस वजह से आपकी साइट को स्पैम वाली साइट के रूप में भी देखा जा सकता है.

  • गलत (वैकल्पिक टेक्स्ट मौजूद नहीं है): <img src="puppy.jpg"/>
  • गलत (कीवर्ड स्टफ़िंग): <img src="puppy.jpg" alt="puppy dog baby dog pup pups puppies doggies pups litter puppies dog retriever labrador wolfhound setter pointer puppy jack russell terrier puppies dog food cheap dogfood puppy food"/>
  • बेहतर: <img src="puppy.jpg" alt="puppy"/>
  • सबसे सही: <img src="puppy.jpg" alt="Dalmatian puppy playing fetch"/>

हमारा सुझाव है कि आप साइट को ऐक्सेस कर पाने की जांच करने वाले टूल और धीमे नेटवर्क कनेक्शन पर अपनी साइट के इस्तेमाल को आज़माने के लिए एम्युलेटर से, अपने कॉन्टेंट की जांच करें.

अपनी सभी इमेज ढूंढने में हमारी मदद करें

इमेज के लिए सिमैंटिक मार्कअप इस्तेमाल करना

इमेज को इंडेक्स करने के लिए, Google आपके पेजों के एचटीएमएल को पार्स करता है. हालांकि, वह सीएसएस इमेज को इंडेक्स नहीं करता.

  • सही: <img src="puppy.jpg" alt="A golden retriever puppy" />
  • गलत: <div style="background-image:url(puppy.jpg)">A golden retriever puppy</div>

इमेज साइटमैप इस्तेमाल करना

आपकी साइट के कॉन्टेंट की जानकारी पाने के लिए, इमेज एक अहम स्रोत होती हैं. आप अपनी इमेज के बारे में Google को ज़्यादा जानकारी भी दे सकते हैं. साथ ही, इमेज साइटमैप में जानकारी जोड़कर इमेज का यूआरएल भी दे सकते हैं, जो कि ऐसा न करने पर शायद हम नहीं देख पाते.

सामान्य साइटमैप के उलट, इमेज साइटमैप में दूसरे डोमेन के यूआरएल भी शामिल हो सकते हैं. वहीं, सामान्य साइटमैप में क्रॉस-डोमेन (अलग-अलग डोमेन) के यूआरएल देने की मंज़ूरी नहीं होती. इससे आपको इमेज होस्ट करने के लिए सीडीएन (कॉन्टेंट डिलीवरी नेटवर्क) इस्तेमाल करने की मंज़ूरी मिलती है. हमारा सुझाव है कि आप Search Console में सीडीएन के डोमेन नाम की पुष्टि कर लें. इससे हम आपको उन गड़बड़ियों के बारे में बता पाएंगे जो पेज क्रॉल करने पर मिल सकती हैं.

Google Images पर काम करने वाले फ़ॉर्मैट

Google Images पर इन फ़ॉर्मैट की इमेज काम करती हैं: BMP, GIF, JPEG, PNG, WebP, और SVG.

आप डेटा यूआरआई के तौर पर इमेज को इनलाइन भी कर सकते हैं. डेटा यूआरआई की मदद से, आप Base64 एन्कोड की गई स्ट्रिंग के तौर पर img एलिमेंट के src को तय करके, फ़ाइल (जैसे कि इमेज) को इनलाइन कर सकते हैं. ऐसा करने के लिए आपको ये फ़ॉर्मैट इस्तेमाल करने होंगे:

<img src="data:image/svg+xml;base64,[data]">

इमेज को इनलाइन करने से एचटीटीपी अनुरोधों को कम किया जा सकता है. हालांकि, आपकाे साेच-समझकर इमेज काे इनलाइन करना चाहिए, क्योंकि इससे पेज का साइज़ बढ़ सकता है. इसके बारे में ज़्यादा जानकारी पाने के लिए, वेब की बुनियादी बाताें वाले पेज पर इनलाइन इमेज के फ़ायदे और नुकसान देखें.

रिस्पॉन्सिव (डिवाइस के हिसाब से आकार बदलने वाली) इमेज

रिस्पॉन्सिव वेब पेज डिज़ाइन करने से उपयोगकर्ताओं को पेज खोलने या देखने में आसानी होती है, क्योंकि उपयोगकर्ता किसी भी डिवाइस पर साइट खोल सकते हैं. आपकी वेबसाइट पर इमेज अच्छी तरह से अपलाेड हो, इसके सबसे अच्छे तरीकाें के बारे में जानने के लिए, इमेज के बारे में वेब की बुनियादी बातें देखें.

रिस्पॉन्सिव इमेज के बारे में बताने के लिए वेबपेज, <img srcset> एट्रिब्यूट या <picture> एलिमेंट का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, कुछ ब्राउज़र और क्रॉलर को ये एट्रिब्यूट समझ में नहीं आते. हम सुझाव देते हैं कि आप img src एट्रिब्यूट का इस्तेमाल करके, हमेशा एक फ़ॉलबैक यूआरएल दें.

srcset एट्रिब्यूट की मदद से आप स्क्रीन के अलग-अलग साइज़ के लिए, एक ही इमेज के अलग-अलग वर्शन तय कर सकते हैं.

उदाहरण: <img srcset>

<img srcset="example-320w.jpg 320w,
       example-480w.jpg 480w,
       example-800w.jpg 800w"
   sizes="(max-width: 320px) 280px,
      (max-width: 480px) 440px,
      800px"
   src="example-800w.jpg" alt="responsive web!">

<picture> एलिमेंट के ज़रिए, आप एक ही इमेज के अलग-अलग <source> वर्शन एक साथ रख सकते हैं. यह एक फ़ॉलबैक तरीका बताता है, ताकि डिवाइस की पिक्सल डेंसिटी (हर इंच या सेंटीमीटर में पिक्सल की संख्या) और स्क्रीन के साइज़ जैसी विशेषताओं के हिसाब से, ब्राउज़र सही इमेज चुन सके. यह picture एलिमेंट, उन क्लाइंट सर्वर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है जो नए फ़ॉर्मैट के साथ काम नहीं करते. इसके तहत, इस सर्वर पर ग्रेसफ़ुल डिग्रेडेशन के साथ इमेज के नए फ़ॉर्मैट का इस्तेमाल किया जाता है.

हम सुझाव देते हैं कि आप हमेशा इन फ़ॉर्मैट का इस्तेमाल करके, picture टैग की मदद से src एट्रिब्यूट वाले img एलिमेंट को फ़ॉलबैक के तौर पर ज़रूर जोड़ें:

उदाहरण: <picture>

<picture>
 <source type="image/svg+xml" srcset="pyramid.svg">
 <source type="image/webp" srcset="pyramid.webp">
 <img src="pyramid.png" alt="large PNG image...">
</picture>

सेफ़ सर्च सुविधा के लिए ऑप्टिमाइज़ करना

सेफ़ सर्च, आपके खाते में मौजूद ऐसी सेटिंग होती है जाे यह तय करती है कि Google Search के नतीजों में, अश्लील इमेज, वीडियाे, और वेबसाइट दिखाने पर रोक लगानी है या नहीं. अगर ज़रूरी हो, तो आप Google को यह बता सकते हैं कि आपकी वेबसाइट पर किस तरह की इमेज मौजूद हैं, ताकि आपकी इमेज पर सेफ़ सर्च की सेटिंग लागू हो पाएं.

सिर्फ़ वयस्कों के देखने लायक इमेज को एक ही यूआरएल पर रखना

अगर आपकी साइट पर वयस्कों के लिए बनी इमेज हैं, तो हमारा सुझाव है कि आप इन्हें अपनी साइट की दूसरी इमेज से अलग रखें. उदाहरण के लिए: http//www.example.com/adult/image.jpg.

वयस्कों के लिए बनाए गए पेजों में मेटाडेटा जोड़ना

जब उपयोगकर्ता का सेफ़ सर्च फ़िल्टर चालू होता है, तो हमारे एल्गोरिदम कई तरह के सिग्नल का इस्तेमाल करके यह तय करते हैं कि किसी इमेज या फिर पूरे पेज को नतीजों में दिखाया जाना चाहिए या नहीं. इमेज के मामले में, इनमें से कुछ सिग्नल मशीन लर्निंग से जनरेट होते हैं. हालांकि, सेफ़ सर्च फ़िल्टर कुछ दूसरी चीज़ों पर भी ध्यान देता है, जैसे कि इमेज को पहले कहां और किस कॉन्टेक्स्ट (संदर्भ) में इस्तेमाल किया गया था.

सबसे अच्छा सिग्नल है, वयस्कों के लिए बनाए गए पेज को खुद मार्क करना. अगर आप वयस्क कॉन्टेंट प्रकाशित करते हैं, तो हमारा सुझाव है कि अपने पेजों पर इन मेटा टैग में से किसी एक को जोड़ें:

<meta name="rating" content="adult" />
<meta name="rating" content="RTA-5042-1996-1400-1577-RTA" />

ऐसे कई उपयोगकर्ता हैं जो नहीं चाहते कि जब वह कुछ खोज रहे हों, तो खोज के नतीजों में वयस्क कॉन्टेंट दिखे. खासकर तब, जब बच्चे भी वही डिवाइस इस्तेमाल करते हों. जब आप इनमें से कोई एक मेटा टैग देते हैं, तो उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिलता है, क्योंकि उन्हें ऐसे कोई नतीजे नहीं दिखते जिसे वे नहीं देखना चाहते या जिसे देखने की उम्मीद नहीं करते.

और अंत में...

कृपया हमारी एसईओ स्टार्टर गाइड पढ़ें. इसमें पेज की रैंक बेहतर करने के लिए काफ़ी जानकारी दी गई है. अगर आपके पास और भी सवाल हैं, तो कृपया उन्हें Google Search Central के सहायता फ़ोरम में पोस्ट करें.