मैलवेयर और अनचाहा सॉफ़्टवेयर

Google, वेबसाइटों की जांच करके पता लगाता है कि उन पर ऐसे सॉफ़्टवेयर या डाउनलोड होने वाली ऐसी फ़ाइलें तो मौजूद नहीं हैं जिनसे उपयोगकर्ताओं को वेबसाइट इस्तेमाल करने में परेशानी हो. सुरक्षा की समस्याओं वाली रिपोर्ट में आप अपनी साइट पर होस्ट की गई ऐसी सभी फ़ाइलों की सूची देख सकते हैं जो शायद उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित न हों.

खास जानकारी

मैलवेयर और अनचाहे सॉफ़्टवेयर डाउनलोड किए जा सकने वाले ऐसे बाइनरी या ऐप्लिकेशन होते हैं जो वेबसाइट पर मौजूद होते हैं. इसके अलावा, वे साइट पर आने वाले उपयोगकर्ताओं को भी नुकसान पहुंचाते हैं.

मैलवेयर क्या है?

मैलवेयर एक तरह का सॉफ़्टवेयर या मोबाइल ऐप्लिकेशन होता है. इसे खास तौर पर किसी कंप्यूटर, मोबाइल डिवाइस, उन पर इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ़्टवेयर या उनके उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया जाता है. मैलवेयर से उपयोगकर्ता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां की जाती हैं. इसमें उपयोगकर्ता की सहमति के बिना सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करने और वायरस जैसे नुकसान पहुंचाने वाले सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करने जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं. कभी-कभी वेबसाइट के मालिकों को यह नहीं पता होता कि उनकी वेबसाइट से डाउनलोड की जाने वाली फ़ाइलों को मैलवेयर के तौर पर देखा जा रहा है. इसलिए, ऐसा हो सकता है कि ये बाइनरी फ़ाइलें अनजाने में होस्ट कर दी गई हों.

अनचाहा सॉफ़्टवेयर क्या है?

अनचाहा सॉफ़्टवेयर ऐसी फ़ाइल या ऐसा मोबाइल ऐप्लिकेशन होता है जिसकी मदद से उपयोगकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी की जाती है या उनके डिवाइस पर ऐसी गतिविधियां की जाती हैं जिनके बारे में उन्हें पता नहीं होता. इसके अलावा, इससे उपयोगकर्ताओं को, ब्राउज़ करने या अपने डिवाइस का इस्तेमाल करते समय परेशानी भी होती है. इसके उदाहरण ऐसे सॉफ़्टवेयर हैं जो आपके होम पेज या ब्राउज़र की सेटिंग में अनचाहे बदलाव कर देते हैं. इसके अलावा, ये ऐसे ऐप्लिकेशन हो सकते हैं जो आपको बिना बताए आपकी निजी या व्यक्तिगत जानकारी दूसरों के साथ शेयर कर सकते हैं.

दिशा-निर्देश

ध्यान रखें कि अनचाहे सॉफ़्टवेयर से जुड़ी नीति का उल्लंघन न हो और इसके लिए यहां दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें. इस सूची में बताई गई गतिविधियों के बारे में उपयोगकर्ताओं को चेतावनी दी जाएगी. हालांकि, ये इन्हीं तक सीमित नहीं है. ऐसा तब होगा, जब वे किसी साइट या ऐप्लिकेशन पर जाएंगे या कोई फ़ाइल डाउनलोड करेंगे. सुरक्षा की समस्याओं वाली रिपोर्ट में आप अपनी साइट पर होस्ट की गई ऐसी सभी फ़ाइलों की सूची देख सकते हैं जो शायद उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित न हों.

अपने बारे में गलत जानकारी न दें
  • उपयोगकर्ताओं को सॉफ़्टवेयर और उसे बनाए जाने के मकसद के बारे में सही जानकारी दें. उपयोगकर्ताओं को, डाउनलोड होने वाले सॉफ़्टवेयर के बारे में पूरी और सही-सही जानकारी होनी चाहिए. जिस विज्ञापन पर क्लिक करके सॉफ़्टवेयर डाउनलोड किया जा रहा है उसमें साफ़ तौर पर बताया जाना चाहिए कि क्या-क्या डाउनलोड होगा. ऐसे विज्ञापन जो कुछ डाउनलोड करने में उपयोगकर्ताओं की दिलचस्पी जगाते हों, धोखाधड़ी करने वाले या गलत जानकारी देने वाले नहीं होने चाहिए, जैसे कि:
    • ऐसा विज्ञापन जिसमें सिर्फ़ "डाउनलोड" या "चलाएं" शब्द शामिल हो. इससे पता नहीं चलता कि विज्ञापन किस सॉफ़्टवेयर को डाउनलोड करने के बारे में है.
    • उपयोगकर्ताओं को "चलाएं" बटन दिखाया जाता है, लेकिन उस पर क्लिक करने पर कुछ डाउनलोड हो जाता है.
    • ऐसा विज्ञापन जिसमें प्रकाशक की वेबसाइट के डिज़ाइन की नकल की जाती है और किसी कॉन्टेंट (उदाहरण के लिए, किसी फ़िल्म) को डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है. हालांकि, उस पर क्लिक करने पर कोई दूसरा सॉफ़्टवेयर डाउनलोड होने लगता है.
    • हमारे ऑनलाइन सुरक्षा ब्लॉग पर सोशल इंजीनियरिंग के बारे में पढ़ें.
  • विज्ञापन में इसकी जानकारी दें कि आपका सॉफ़्टवेयर किस तरह काम करेगा. अपने सॉफ़्टवेयर में मौजूद सुविधाओं के बारे में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए और यह भी बताना चाहिए कि यह किस तरह काम करता है. अगर आपके सॉफ़्टवेयर की मदद से, उपयोगकर्ता का डेटा इकट्ठा किया जाता है या उनके ब्राउज़र में विज्ञापन दिखाए जाते हैं, तो इन गतिविधियों के बारे में साफ़ तौर पर बताएं. साथ ही, इन गतिविधियों को मामूली सुविधाओं के तौर पर न दिखाएं.
  • उपयोगकर्ता से बिना कुछ छिपाए, उन्हें साफ़ तौर पर बताएं कि आपके सॉफ़्टवेयर से उनके ब्राउज़र और सिस्टम में क्या बदलाव होंगे. उपयोगकर्ताओं को यह विकल्प दें कि वे सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करने के सभी ज़रूरी तरीकों और इनसे होने वाले बदलावों की समीक्षा करके उन्हें मंज़ूरी दे पाएं. आपके प्रोग्राम के मुख्य यूज़र इंटरफ़ेस (यूआई) में बाइनरी फ़ाइल के कॉम्पोनेंट से जुड़ी जानकारी साफ़ तौर पर दी जानी चाहिए. साथ ही, उनके मुख्य काम के बारे में बताया जाना चाहिए. उपयोगकर्ता के पास, बाइनरी फ़ाइल के साथ इंस्टॉल होने वाले कॉम्पोनेंट को इंस्टॉल होने से रोकने का विकल्प होना चाहिए. उदाहरण के लिए, इन विकल्पों को छिपाना या मुश्किल से दिखने वाले टेक्स्ट का इस्तेमाल करना, जानकारी देने का सही तरीका नहीं है.
  • बिना अनुमति के, अपने प्रॉडक्ट का प्रचार न करें. अपने प्रॉडक्ट का प्रचार करने या उसे सही ठहराने के लिए, दूसरी कंपनियों के लोगो का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना न करें. बिना अनुमति के सरकारी लोगो का इस्तेमाल न करें.
  • उपयोगकर्ता को डराएं नहीं. सॉफ़्टवेयर की मदद से उपयोगकर्ता को उसके डिवाइस के बारे में गलत जानकारी नहीं देनी चाहिए. उदाहरण के लिए, उपयोगकर्ता को इस बारे में गलत जानकारी देना कि उनके सिस्टम में वायरस है या सिस्टम की सुरक्षा को खतरा है. सॉफ़्टवेयर की मदद से ऐसी किसी सेवा देने का दावा नहीं किया जाना चाहिए (जैसे कि "अपने कंप्यूटर के काम करने की रफ़्तार बढ़ाएं") जो इसमें उपलब्ध नहीं है या इसकी मदद से नहीं दी जा सकती है. उदाहरण के लिए, "मुफ़्त" कंप्यूटर क्लीनर और ऑप्टिमाइज़र का विज्ञापन तब तक इस तरह नहीं करना चाहिए, जब तक कि विज्ञापन में बताई गई सेवाओं और कॉम्पोनेंट का इस्तेमाल करने के लिए पैसे चुकाने की ज़रूरत न हो.
सॉफ़्टवेयर से जुड़े दिशा-निर्देश
  • अगर आपके सॉफ़्टवेयर से Chrome की सेटिंग में बदलाव होता है, तो 'Google सेटिंग' API का इस्तेमाल करें. उपयोगकर्ता की डिफ़ॉल्ट खोज सेटिंग, शुरुआती पेज या नए टैब में कोई भी बदलाव Chrome की सेटिंग बदलने वाले एपीआई का इस्तेमाल करके किया जाना चाहिए. इसके लिए 'Chrome एक्सटेंशन' इस्तेमाल करने और एक्सटेंशन सही तरीके से इंस्टॉल करने की ज़रूरत होती है.
  • ब्राउज़र और ऑपरेटिंग सिस्टम के डायलॉग से उपयोगकर्ता को चेतावनी दें. उन चेतावनियों को न रोकें जो उपयोगकर्ताओं को ब्राउज़र या ऑपरेटिंग सिस्टम से मिलती हैं. खास तौर पर, ऐसी सूचनाएं जिनसे उपयोगकर्ता को उनके ब्राउज़र या ओएस में हुए बदलावों के बारे में सूचना दी जाती है.
  • हम आपको अपने कोड की पुष्टि करने के लिए उस पर डिजिटल हस्ताक्षर करने का सुझाव देते हैं. हालांकि, बाइनरी फ़ाइल की पुष्टि के लिए डिजिटल हस्ताक्षर न होने की वजह से उसे अनचाहे सॉफ़्टवेयर के तौर पर फ़्लैग नहीं किया जाता. फिर भी, हमारा सुझाव है कि प्रोग्राम पर, कोड के लिए डिजिटल हस्ताक्षर जारी करने वाली संस्था से मिला, मान्य और पुष्टि किया गया डिजिटल हस्ताक्षर होना चाहिए. डिजिटल हस्ताक्षर में प्रकाशक की जानकारी शामिल होनी चाहिए, जिसकी पुष्टि की जा सके.
  • TLS/SSL कनेक्शन से मिलने वाली सुरक्षा और बचाव के उपायों को जोखिम में न डालें. ऐसे ऐप्लिकेशन हो सकते हैं जो रूट सर्टिफ़िकेट या अथॉरिटी सर्टिफ़िकेट को इंस्टॉल न कर पाएं. यह ऐप्लिकेशन तब तक SSL/TLS कनेक्शन को नहीं रोक सकता, जब तक कि इसे विशेषज्ञों के लिए सॉफ़्टवेयर को डीबग करने या उसकी जांच करने के लिए न बनाया गया हो. ज़्यादा जानने के लिए, Google के सुरक्षा ब्लॉग की पोस्ट देखें.
  • उपयोगकर्ता के डेटा की सुरक्षा करें. मोबाइल ऐप्लिकेशन जैसे सॉफ़्टवेयर को उपयोगकर्ता का सिर्फ़ निजी डेटा सर्वर को भेजा जाना चाहिए. ऐसा इसलिए करना होता है, क्योंकि यह ऐप्लिकेशन के काम करने के लिए ज़रूरी है. सर्वर को डेटा भेजने की प्रोसेस के बारे में उपयोगकर्ता को सूचना दी जानी चाहिए. साथ ही, यह डेटा सुरक्षित करके भेजा जाना चाहिए.
  • उपयोगकर्ता के ब्राउज़र के साथ छेड़छाड़ न करें. आपकी बाइनरी फ़ाइल की वजह से, उपयोगकर्ता के ब्राउज़र इस्तेमाल करने के तरीके पर असर नहीं पड़ना चाहिए. पक्का करें कि डाउनलोड होने वाली बाइनरी फ़ाइलें इन सामान्य नीतियों का पालन करती हों:
    • ब्राउज़र की सेटिंग को रीसेट करने की सुविधा में कोई छेड़-छाड़ न करें. Chrome में, ब्राउज़र की सेटिंग को रीसेट करें बटन के बारे में पढ़ें.
    • सेटिंग बदलने के लिए ब्राउज़र या ऑपरेटिंग सिस्टम के यूज़र इंटरफ़ेस (यूआई) कंट्रोल की सेटिंग में कोई बदलाव या छेड़-छाड़ न करें. आपके प्रोग्राम से ब्राउज़र की सेटिंग में होने वाले बदलावों के बारे में उपयोगकर्ताओं को सही सूचना दी जानी चाहिए. साथ ही, उनके पास इन बदलावों को कंट्रोल करने का विकल्प होना चाहिए. Chrome की सेटिंग बदलने के लिए सेटिंग एपीआई का इस्तेमाल करें. साथ ही, (Chromium का यह ब्लॉग पोस्ट पढ़ें).
    • एक्सटेंशन इस्तेमाल करके Google Chrome की सुविधाओं में बदलाव करें. प्रोग्राम में कोई दूसरा तरीका इस्तेमाल करके ब्राउज़र में कोई बदलाव न करें. उदाहरण के लिए, आपके प्रोग्राम में, ब्राउज़र पर विज्ञापन देने के लिए डीएलएल (डाइनैमिक लिंक की लाइब्रेरी), ट्रैफ़िक पर नज़र रखने वाले प्रॉक्सी, उपयोगकर्ता की गतिविधियों पर नज़र रखने वाले लेयर्ड सेवा देने वाली कंपनी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. इसके अलावा, Chrome की बाइनरी को पैच करके हर वेब पेज पर नया यूज़र इंटरफ़ेस (यूआई) भी शामिल न करें.
    • प्रॉडक्ट और उसके कॉम्पोनेंट के बारे में गलत तरीके से जानकारी देकर उपयोगकर्ता को डराने और/या झूठे, गुमराह करने वाले दावे करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए. उदाहरण के लिए, आपके प्रॉडक्ट को ऐसे झूठे दावे नहीं करने चाहिए कि सिस्टम में सुरक्षा से जुड़ी कोई गंभीर समस्या या वायरस है. रजिस्ट्री क्लीनर जैसे प्रोग्राम को उपयोगकर्ता के कंप्यूटर या डिवाइस की स्थिति के बारे में चेतावनी देने वाले मैसेज नहीं दिखाने चाहिए. साथ ही, यह दावा भी नहीं करना चाहिए कि वे उपयोगकर्ता के कंप्यूटर को ऑप्टिमाइज़ कर सकते हैं.
    • अनइंस्टॉल करने की प्रोसेस को ढूंढने लायक और आसान बनाएं. साथ ही, उपयोगकर्ता को उसके बारे में चेतावनी न दें. आपके प्रोग्राम में उपयोगकर्ता को लेबल के साथ यह जानकारी दी जानी चाहिए कि ब्राउज़र और/या सिस्टम की सेटिंग को पहले जैसी किस तरह किया जाए. अनइंस्टॉलर को प्रॉडक्ट के सभी कॉम्पोनेंट हटा देने चाहिए. साथ ही, अनइंस्टॉल करने की प्रोसेस जारी रखने से उपयोगकर्ता को किसी तरीके से रोकना नहीं चाहिए. इन तरीकों में उपयोगकर्ता को चेतावनी देते हुए यह दावा करना शामिल है कि सॉफ़्टवेयर अनइंस्टॉल करने पर उनके सिस्टम या निजता को नुकसान पहुंच सकता है.
  • सॉफ़्टवेयर में दूसरी चीज़ें सुरक्षित ढंग से शामिल करें. अगर आपके सॉफ़्टवेयर को इंस्टॉल करते समय दूसरे कॉम्पोनेंट भी इंस्टॉल होते हैं, तो आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि इनमें से कोई भी कॉम्पोनेंट ऊपर बताए गए सुझावों का उल्लंघन न करे.
Chrome एक्सटेंशन से जुड़े दिशा-निर्देश
  • सभी एक्सटेंशन Chrome में दिखाए और इंस्टॉल किए जाने चाहिए, ताकि नीतियों का पालन हो सके. एक्सटेंशन 'Chrome वेब स्टोर' में होस्ट किए जाने चाहिए और डिफ़ॉल्ट रूप से बंद होने चाहिए. साथ ही, यह ज़रूरी है कि ये एक्सटेंशन 'Chrome वेब स्टोर' की नीतियों (जिसमें खास सुविधा देने की नीति भी शामिल है) का पालन करते हों. प्रोग्राम से इंस्टॉल किए गए एक्सटेंशन के लिए Chrome एक्सटेंशन इंस्टॉल करने का प्रमाणित तरीका इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इस तरीके में उपयोगकर्ता को उन्हें Chrome में चालू करने के लिए कहा जाएगा. हो सकता है कि एक्सटेंशन की मदद से Chrome के डायलॉग रोके न जा सकें. इन डायलॉग से उपयोगकर्ता को सेटिंग में हुए बदलावों के बारे में सूचना दी जाती है.
    Chrome पॉप-अप एक एक्सटेंशन को इंस्टॉल करने की अनुमति मांग रहा है.
  • Chrome एक्सटेंशन हटाने के तरीकों के बारे में उपयोगकर्ताओं को निर्देश दें. उपयोगकर्ता के लिए किसी प्रोग्राम को इस्तेमाल करने का अनुभव तब अच्छा होता है, जब अनइंस्टॉल करने पर वे सभी चीज़ें भी हट जाएं जो उसके साथ इंस्टॉल हुई थीं. प्रोग्राम अनइंस्टॉल करने के तरीके में उपयोगकर्ता के लिए, एक्सटेंशन को खुद बंद करने और मिटाने के निर्देश भी शामिल होने चाहिए.
  • अगर आपकी बाइनरी फ़ाइल, ब्राउज़र में ऐड-ऑन इंस्टॉल करती है या डिफ़ॉल्ट ब्राउज़र सेटिंग बदलती है, तो यह कार्रवाई इंस्टॉल करने के उस तरीके और एपीआई के हिसाब से होनी चाहिए जो ब्राउज़र पर काम करते हैं. उदाहरण के लिए, अगर बाइनरी फ़ाइल से कोई Chrome एक्सटेंशन इंस्टॉल होता है, तो उसे 'Chrome वेब स्टोर' में होस्ट किया जाना चाहिए. इसके लिए, यह भी ज़रूरी है कि Chrome के डेवलपर कार्यक्रम की नीतियों का पालन किया गया हो. अगर आपकी बाइनरी फ़ाइल, वेब स्टोर के अलावा किसी दूसरी जगह पर उपलब्ध कराने के तरीकों से जुड़ी Chrome की नीति का उल्लंघन करते हुए कोई Chrome एक्सटेंशन इंस्टॉल करती है, तो उसे मैलवेयर माना जाएगा.
मोबाइल ऐप्लिकेशन से जुड़े दिशा-निर्देश
  • उपयोगकर्ता को बताएं कि आप उनका डेटा इकट्ठा करना चाहते हैं. उपयोगकर्ता का डेटा इकट्ठा करके, डिवाइस से भेजना शुरू करने से पहले उन्हें इसके लिए सहमति देने का मौका दें. इसमें मोबाइल डिवाइस पर मौजूद तीसरे पक्ष के खाते, ईमेल, फ़ोन नंबर, इंस्टॉल किए गए ऐप्लिकेशन, और फ़ाइलें शामिल हैं. उपयोगकर्ता के इकट्ठा किए गए सभी निजी या संवेदनशील डेटा को आधुनिक क्रिप्टोग्राफ़ी (उदाहरण के लिए, एचटीटीपीएस पर) का इस्तेमाल करके, सुरक्षित तरीके से संभाला जाना चाहिए. इसमें ट्रांसमिट किया जाने वाला डेटा शामिल है. ऐसे ऐप्लिकेशन जो Google Play पर उपलब्ध नहीं हैं, वे किस तरह डेटा इकट्ठा करते हैं, इस बारे में ऐप्लिकेशन में उपयोगकर्ता को जानकारी देनी चाहिए. Google Play पर उपलब्ध ऐप्लिकेशन के लिए, Play की नीति के मुताबिक जानकारी दी जानी चाहिए. ऐप्लिकेशन की जिन सुविधाओं के बारे में बताया गया है उनके अलावा किसी और चीज़ के लिए डेटा इकट्ठा न करें.

  • किसी दूसरे ब्रैंड या ऐप्लिकेशन के नाम पर काम न करें. साथ ही, किसी दूसरे ब्रैंड या ऐप्लिकेशन की इमेज या डिज़ाइन का गलत तरीके से या अनुमति के बिना इस्तेमाल न करें. ऐसा करने से उपयोगकर्ता गुमराह हो सकते हैं.
  • ऐप्लिकेशन में उसके काम करने से जुड़े कॉन्टेंट ही रखें. ऐप्लिकेशन की वजह से दूसरे ऐप्लिकेशन या डिवाइस के इस्तेमाल पर असर नहीं पड़ना चाहिए. ऐप्लिकेशन में ऐसे विज्ञापन या दूसरे कॉन्टेंट नहीं दिखाए जाने चाहिए जो ऐप्लिकेशन के काम करने के तरीके और सुविधाओं से जुड़े न हों. ऐसे विज्ञापन या कॉन्टेंट दिखाने के लिए उपयोगकर्ता की मंज़ूरी लेनी ज़रूरी है. साथ ही, ये विज्ञापन जहां भी दिखाए जाएं वहां उनके स्रोत की पूरी जानकारी भी शामिल करनी चाहिए.
  • उपयोगकर्ता को विज्ञापन में बताए गए ऐप्लिकेशन की सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए. ऐप्लिकेशन में उपयोगकर्ता के लिए, विज्ञापन में बताई गई सभी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए. ऐप्लिकेशन से इसके कॉन्टेंट को अपडेट किया जा सकता है. ऐसे में, उपयोगकर्ता को जानकारी दिए बिना और उनकी सहमति के बिना किसी भी दूसरे ऐप्लिकेशन को डाउनलोड नहीं किया जाना चाहिए.
  • उपयोगकर्ता को ऐप्लिकेशन की हर गतिविधि के बारे में सही जानकारी दें. ऐप्लिकेशन की वजह से दूसरे ऐप्लिकेशन या उनके शॉर्टकट तब तक अनइंस्टॉल नहीं होने चाहिए, जब तक कि इसकी जानकारी उपयोगकर्ता को ऐप्लिकेशन में न दी गई हो. इसके अलावा, वे किसी ऐप्लिकेशन या उसके शॉटकर्ट की जगह पर इंस्टॉल भी नहीं होने चाहिए. ऐप्लिकेशन अनइंस्टॉल करने पर उससे जुड़ी सभी चीज़ें हट जानी चाहिए. ऐप्लिकेशन में डिवाइस के ऑपरेटिंग सिस्टम या दूसरे ऐप्लिकेशन के उन मैसेज की नकल नहीं की जानी चाहिए जिनमें उपयोगकर्ताओं को कार्रवाई करने के लिए सुझाव दिए जाते हैं.

यह ज़रूरी है कि Google Play की मदद से डिस्ट्रिब्यूट किए गए ऐप्लिकेशन डेवलपर कार्यक्रम की नीतियों और डेवलपर वितरण अनुबंध का पालन करें, जिसके लिए ये शर्तें भी लागू होती हैं.

समस्या काे हल करना

पक्का करें कि आपकी साइट या ऐप्लिकेशन में ऊपर दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन किया जाता है. इसके बाद, आप सुरक्षा की समस्याओं वाली रिपोर्ट में साइट या ऐप्लिकेशन की समीक्षा के लिए अनुरोध कर सकते हैं.

अगर आपके मोबाइल ऐप्लिकेशन पर चेतावनियां दिख रही हैं, तो ऐप्लिकेशन की पुष्टि करने और इसके लिए अपील करने के बारे में यहां पढ़ें.